Hum Single hi Achhe hai
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Hum Single hi Achhe hai By Sangita Yaduvanshi Poem Lyrics

कभी-कभी जिंदगी में ऐसा phase आता है, जब हम खुद को समझा देते हैं कि अब हमें किसी की जरूरत नहीं है… और फिर धीरे-धीरे ये आदत बन जाती है। संगीता भी अब अक्सर यही कहती है—“Hum Single hi Achhe hai”

उसने रिश्तों को करीब से देखा है, टूटते हुए भी… बदलते हुए भी। पहले जहाँ बातों में सच्चाई होती थी, अब वहाँ बस formality रह गई है। इसलिए वो खुद को यही समझाती है कि single hi achhe hai, कम से कम दिल तो बार-बार नहीं टूटेगा।

लेकिन सच कहें तो ये सिर्फ उसकी जुबान कहती है… दिल नहीं।
रात को जब सब शांत होता है, तब वही दिल पूछता है, अगर सच में “hum single hi achhe hai”, तो फिर किसी के message का इंतज़ार क्यों होता है?

संगीता की यही सच्चाई है, ऊपर से strong, अंदर से थोड़ी सी उम्मीद अभी भी बाकी है।तो चलिए फिर इस सच्चाई को पढ़ते है। एंड आनंद लेते है।

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Hum Single hi Achhe hai by sangita

आज के रिश्ते कहाँ इतने सच्चे हैं,
हम सिंगल ही अच्छे हैं।

लेकिन दिल कहाँ समझता है,
दिल कहता है—
कोई होना चाहिए,
जो तुमसे पूरी रात बात करने की ज़िद पर आ जाए।

कोई होना चाहिए,
जिसकी 2 मिनट की नज़रें भी कीमती हो जाएँ।

कोई होना चाहिए,
जो तुम्हारा हाथ थामे
और उसकी हरकतों पर लम्हे रास्ते बदल जाएँ।

कोई होना चाहिए,
जिसकी एक मुलाकात का
वो आखिरी पल… और वो “बाय” कहना मुश्किल हो जाए।

पर दिल कहाँ मानता है,
कि आज के रिश्ते कहाँ इतने सच्चे हैं,
इसलिए हम सिंगल ही अच्छे हैं।

पर फिर भी ये दिल है ना,
इसको समझना थोड़ा मुश्किल है।

ये कहता है
कोई होना चाहिए,
जो हल्के हाथों से तुम्हारी उँगलियाँ थामे,
कुछ तुम्हारी सुने, कुछ अपनी सुनाए।

कोई होना चाहिए,
जो तुम्हारी वही पुरानी बातें
बार-बार सुने और झूठा मुस्कुराए।

और तुम्हारी बाइक के हॉर्न पर
बालकनी में आ जाए।

कोई होना चाहिए,
जिसके साथ आसमान के तले गुज़रे लम्हों को
तुम याद करो,
और शर्मा कर ज़ुल्फ़ें अपने कानों के पीछे छुपाओ।

पर दिल तो नादान है ना,
कौन समझाए इसे—
कि आज के रिश्ते कहाँ इतने सच्चे हैं,
इसलिए हम सिंगल ही अच्छे हैं।।

Final word :

आखिर में संगीता फिर खुद से वही बात दोहराती है,कि अब उसे किसी की जरूरत नहीं… कि अब वो बदल चुकी है… और हाँ, वो मान भी लेती है कि single hi achhe hai। क्योंकि उसने समझ लिया है कि हर रिश्ता सच्चा नहीं होता,
हर साथ हमेशा का नहीं होता।

लेकिन दिल है ना… वो पूरी तरह कभी नहीं बदलता।वो आज भी कभी-कभी बिना वजह किसी को याद कर लेता है, कभी किसी छोटी सी बात पर मुस्कुरा देता है, और फिर खुद ही चुप हो जाता है।

शायद इसलिए संगीता की कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
वो बस खुद को संभालना सीख गई है।और हर बार टूटने से बेहतर, अब वो बस इतना ही कहती है Hum Single hi achhe hai.

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