Allama Iqbal Shayari अपनी गहराई, खूबसूरत शब्दों और जिंदगी को देखने के अलग नजरिए के लिए आज भी पढ़ी जाती है। उनकी शायरी में खुदी, मेहनत, हौसले, उम्मीद और इंसान की अपनी पहचान जैसे कई विषयों की झलक देखने को मिलती है। यही वजह है कि उनके कई शेर आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं और सोचने पर मजबूर करते हैं।
अगर आप Allama Iqbal Shayari पढ़ना चाहते हैं या उनकी प्रसिद्ध और प्रेरणादायक शायरी खोज रहे हैं, तो यह collection आपके लिए है। यहां आपको Famous Allama Iqbal Shayari, Inspirational Shayari, Allama Iqbal Poetry और दिल को छू जाने वाले शेर मिलेंगे। आप अपनी पसंद के शेर पढ़ सकते हैं, उनके अर्थ को समझ सकते हैं और जो पंक्तियां आपको सबसे ज्यादा पसंद आएं उन्हें दोस्तों या सोशल मीडिया Whatsapp , Instagram पर शेयर कर सकते हैं।
Best Allama Iqbal Shayari in Hindi
खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले,
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है!

सितारों से आगे जहां और भी हैं,
अभी इश्क़ के इम्तहां और भी हैं।
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूं मैं,
तू मेरा शौक़ देख, मेरा इंतज़ार देख।
दिल से जो बात निकलती है असर रखती है,
पर नहीं, ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है।
तेरे इश्क़ की इंतहा चाहता हूं,
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूं!
हज़ारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है,
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।
दुआ-ए-दर्द-ए-दिल खुदा से मांग,
ये वो नेमत है जो हर किसी को नहीं मिलती।
यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा सब मिट गए जहां से,
अब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशां हमारा।
शायर आपको Ahmed Faraz shayari की शायरी भी पसंद आएगी।
Famous Allama Iqbal Shayari
तू शाहीन है परवाज़ है काम तेरा,
तेरे सामने आसमां और भी हैं।

निगह बुलंद, सुख़न दिलनवाज़, जां पुर-सोज़,
यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवां के लिए।
नशा पिला के गिराना तो सब को आता है,
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
ख़िराब करने लगा मुझको ये जहां-ए-ख़राब,
अता हो कोई नया आसमां, नया आफ़ताब।
अमल से ज़िंदगी बनती है जन्नत भी जहन्नुम भी,
ये ख़ाकी अपनी फ़ितरत में न नूरी है न नारी है।
वही जमाना-ए-हाल है, वही जमाना-ए-माज़ी,
अगर न हो दिल में कोई तड़प, कोई शौक़-ए-ताज़ा।
जो गुज़र गया उसे याद न कर,
जो बचा है उसे बर्बाद न कर।
सबक़ फिर पढ़ सदाक़त का, अदालत का, शजाअत का,
लिया जाएगा तुझ से काम दुनिया की इमारात का।
मोहब्बत की तमन्ना है तो फिर वो काम कर,
जो तेरे दिल को पाक करे और ज़मीर को ज़िंदा।
जिसे न हो अपनी हक़ीक़त की ख़बर,
वो दूसरों की क्या तलाश करेगा।
Allama Iqbal Shayari on Khudi
खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले,
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है।

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में,
कि हज़ारों सजदे तड़प रहे हैं मेरी जबीन-ए-नियाज़ में।
अपने मन में डूब कर पा जा सुराग-ए-ज़िंदगी,
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
या वो जगह बता दे जहाँ पर खुदा न हो।
जफ़ा जो इश्क़ में होती है वो जफ़ा ही नहीं,
सितम न हो तो मोहब्बत में कुछ मज़ा ही नहीं।
ख़ुदा के बंदे तो हैं हज़ारों, बनों में फिरते हैं मारे मारे,
मैं उसका बंदा बनूंगा जिसको ख़ुदा के बंदों से प्यार होगा।
बुतों से तुझको उम्मीदें, ख़ुदा से नौमीदी,
मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है?
वतन की फ़िक्र कर नादां, मुसीबत आने वाली है,
तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में।
तंदी-ए-बाद-ए-मख़ालिफ़ से न घबरा ऐ उक़ाब,
ये तो चलती है तुझे ऊँचा उड़ाने के लिए।
बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यों,
कार-ए-जहां दराज़ है, अब मेरा इंतज़ार कर!
दिल पाक नहीं तो पाक हो सकता नहीं इंसान,
वरना इब्लीस को भी आते थे सजदे बहुत।
इश्क़ भी हो हिजाब में, हुस्न भी हो हिजाब में,
या तो खुद आकाब में, या मुझे बे-हिजाब कर।
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिंदी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा।
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फिर चिराग़-ए-लाला से रोशन हुए कोह-ओ-दमन,
मुझको फिर नग़मों पे उकसाने लगा मुर्ग़-ए-चमन।

तक़दीर के क़ाज़ी का यह फ़त्वा है अज़ल से,
है जुर्म-ए-ज़ीस्त की पादाश में मर्ग-ए-फ़जानी।
नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुंबद पर,
तू शाहीन है, बसेरा कर पहाड़ों की चट्टानों में।
जो दिल को न कर दे आरिफ़-ए-हक़,
वो इल्म नहीं है, जहालत है।
ख़िरद मंदों से क्या पूछूं कि मेरी इब्तिदा क्या है,
कि मैं तो इस फ़िक्र में हूं कि मेरी इंतहा क्या है।
बातिल से दबने वाले ऐ आसमां नहीं हम,
सौ बार कर चुका है तू इम्तिहां हमारा।
न ढूंढ बुतख़ाने में ख़ुदा को ऐ ग़ाफ़िल,
ख़ुदा तो बसता है तेरे दिल के मकां में।
गुज़र जा बन के सैल-ए-तंद-रू कोह-ओ-बायबां से,
गुुल-ओ-गुुलज़ार की राहों में ठहेरना काम है किसका।
Allama Iqbal Shayari on Life
काफ़िर है तो शमशीर पे करता है भरोसा,
मोमिन है तो बे-तेग़ भी लड़ता है सिपाही।
हर एक मकाम से आगे मकाम है तेरा,
हयात नाम है आगे ही आगे बढ़ने का।
इंसान की ख़्वाहिशों की कोई इंतहा नहीं,
लेकिन जो सब्र करे, वही सबसे अमीर है।
इश्क़ की एक छलांग ने तय कर दिया क़िस्सा तमाम,
इस ज़मीन-ओ-आसमां को ला-मकां समझा था मैं।
जिसकी ख़ुदी है बुलंद, वही है सिकंदर,
वरना मिट्टी का यह पुतला सिर्फ़ मिट्टी ही रहेगा।
हज़ारों साल की तारीख़ में ये देखा गया है,
कि जो मिटा है मुक़द्दर से, वो फिर नहीं उठा।
ये दौर अपने पुजारियों को मार डालता है,
संभल के चलना कि दुनिया का ऐतबार नहीं।
शौक़ तेरा अगर नातमाम हो तो क्या,
तेरी निगाहों में अगर कोई मकाम हो तो क्या!
तेरे आज़ाद बंदों की न ये दुनिया न वो दुनिया,
यहाँ मरने की पाबंदी, वहां जीने की पाबंदी।
ख़ुदी में डूबने वाले कभी मरा नहीं करते,
वो नाम पैदा कर जाते हैं जो कभी मिटा नहीं करते।
ढूंढता फिरता हूं ऐ इक़बाल अपने-आप को,
आप ही गोया मुसाफ़िर, आप ही मंज़िल हूं मैं।
मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहे,
कि दाना ख़ाक में मिल कर गुुल-ओ-गुुलज़ार होता है।
जिंदगी से जुड़े ऐसे ही विचारों के लिए Life Quotes in Hindi का collection देखें।
Allama Iqbal Shayari सिर्फ खूबसूरत शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि इनमें जिंदगी, आत्मविश्वास, मेहनत, हौसले और इंसान की अपनी पहचान से जुड़े गहरे विचार देखने को मिलते हैं। उनके कई शेर आज भी लोगों को मुश्किल परिस्थितियों में आगे बढ़ने और अपनी क्षमता पर विश्वास रखने की प्रेरणा देते हैं।
उम्मीद है कि Allama Iqbal Shayari का यह collection आपको उनकी प्रसिद्ध, प्रेरणादायक और दिल को छू जाने वाली शायरी पढ़ने में पसंद आया होगा। आपको जो शेर सबसे अच्छा लगे, उसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर कर सकते हैं या अपने WhatsApp Status और सोशल मीडिया पर लगा सकते हैं।
Allama Iqbal की सबसे प्रसिद्ध शायरी कौन सी है?
Allama Iqbal की कई शायरियां और शेर अपनी प्रेरणादायक सोच और गहरे अर्थ के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनाओं में खुदी, आत्मविश्वास, मेहनत, हौसले और जिंदगी जैसे विषय प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं।
Allama Iqbal की शायरी में “खुदी” का क्या मतलब है?
Iqbal की philosophy में खुदी का संबंध व्यक्ति की आत्म-पहचान, आत्मविश्वास और अपनी क्षमताओं को पहचानने से है। उनकी कई प्रसिद्ध रचनाओं में खुदी एक महत्वपूर्ण विचार के रूप में सामने आती है।
